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दालों पर आयात शुल्क घटाने पर सरकार विचार कर रही है
कमजोर मानसून के बीच घरेलू दाल उत्पादन में गिरावट की चिंता से निपटने के लिए भारत मसूर और अरहर पर आयात शुल्क कम करने पर विचार कर रहा है। इस कदम से खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
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सरकार खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और बाजार में दालों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए मसूर और पीली दालों पर आयात शुल्क घटाने पर विचार कर रही है। मानसून की कमजोरी के कारण देश में दाल का घरेलू उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिससे आपूर्ति में संकट की आशंका बढ़ गई है।
दाल भारतीय आहार का एक महत्वपूर्ण घटक है और लाखों परिवारों के लिए प्रोटीन का मुख्य स्रोत। बाजार में दालों की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर खाद्य मुद्रास्फीति को प्रभावित करती है। आयात शुल्क में कमी से आयातित दालें सस्ती होंगी, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों पर नियंत्रण रहने में मदद मिल सकती है।
अधिकारियों का मानना है कि यह कदम अल्पकालीन सुस्थिरता प्रदान कर सकता है जब तक कि घरेलू फसल की स्थिति में सुधार न हो जाए। आगामी मानसून का प्रदर्शन और फसल की स्थिति आने वाले महीनों में सरकार की नीति को आकार देगी।
इस तरह की नीतिगत पहल किसानों की आय और उपभोक्ता कल्याण दोनों को संतुलित करने का एक प्रयास है। सरकार पिछले कुछ वर्षों में खाद्य सुरक्षा और कीमत स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न उपाय अपनाती रही है।