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कोयला संकट गहराया: विद्युत मंत्रालय आयातित कोयले के मिश्रण पर विचार कर रहा है
देश के तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार खतरनाक स्तर तक गिर गया है। सितंबर में केवल सात दिन की आपूर्ति बची है, जबकि 74 संयंत्रों की स्थिति गंभीर है।
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भारत के तापीय विद्युत केंद्रों में कोयले की गंभीर कमी देखी जा रही है। 19 सितंबर को विद्युत संयंत्रों में कोयले का स्टॉक 22.9 मिलियन टन तक सीमित रह गया, जो मात्र सात दिन की खपत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। यह स्थिति बिजली आपूर्ति में व्यवधान का खतरा पैदा कर रही है।
इस संकट से निपटने के लिए विद्युत मंत्रालय आयातित कोयले को घरेलू आपूर्ति के साथ अनिवार्य रूप से मिलाने का प्रस्ताव कर रहा है। ऐसे उपाय से आयातित कोयले का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा और बिजली उत्पादन में स्थिरता आ सकेगी।
वर्तमान स्थिति अधिक चिंताजनक इसलिए है कि देश के 74 तापीय विद्युत संयंत्रों के पास अत्यंत कम कोयले का भंडार रह गया है। इन संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित न हो पाई तो देश के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली की गंभीर कमी की स्थिति बन सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या दीर्घकालीन समाधान की मांग करती है। घरेलू कोयले के उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार से कोयले की खरीद को भी बढ़ाना होगा ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े।