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शामली मामला: हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को रिहा किया, धर्मांतरण स्वैच्छिक बताया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली के आयुष मलिक की हिरासत को अवैध घोषित करते हुए उसे मुक्त करने का आदेश दिया है। मलिक ने अदालत में कहा कि उसने स्वेच्छा से धर्मांतरण किया और चांदनी कुरैशी से विवाह किया।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धर्मांतरण से संबंधित शामली के एक विवादास्पद मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आयुष मलिक की हिरासत को कानूनी दृष्टि से अवैध माना और उसे तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया।
मुखबिरों द्वारा दायर की गई याचिका के विरुद्ध अदालत में पेश होते हुए आयुष मलिक ने स्पष्ट किया कि उसने किसी भी बाहरी दबाव के बिना पूर्ण स्वतंत्रता से अपने धर्म परिवर्तन का निर्णय लिया था। उसने बताया कि उसका विवाह चांदनी कुरैशी से उसकी अपनी सहमति और इच्छा से संपन्न हुआ था।
अदालत ने मलिक के बयान को गंभीरता से लिया और यह निर्धारित किया कि उसे अपनी मर्जी से जहां चाहे रहने की स्वतंत्रता है। साथ ही, न्यायालय ने जोर दिया कि भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को अपना धर्म चुनने और अपनी जीवन शैली तय करने का मौलिक अधिकार है।
यह फैसला धर्मांतरण से जुड़े कई मामलों में अदालत के विचारशील दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहां यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सहमति के सिद्धांतों पर जोर देता है।