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हिरासत में मौत के मामले में आरपीएफ अधिकारियों की जमानत याचिका खारिज
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने गोंडा में हिरासत में मौत के मामले में दो आरपीएफ कर्मियों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश ने कहा कि महामारी के बाद भी पुलिस हिरासत में मौतें रुकी नहीं हैं।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने गोंडा जिले में हिरासत में हुई मौत के मामले में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के दोनों कर्मियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस मनीष माथुर की बेंच ने आरपीएफ सब इंस्पेक्टर करन सिंह यादव और कांस्टेबल अमित कुमार यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे नामंजूर कर दिया।
इस फैसले में न्यायाधीश ने एक गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी खत्म हो जाने के बाद भी देश में पुलिस हिरासत में मौतों का सिलसिला थमा नहीं है। यह देश की न्याय व्यवस्था और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
हाई कोर्ट की इस कार्रवाई से आरपीएफ के इन अधिकारियों के खिलाफ मामले में जांच प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले हिरासत में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक सशक्त संदेश देते हैं।
गोंडा में यह घटना पुलिस हिरासत में मानवाधिकार हनन के बढ़ते मामलों में शामिल है। न्यायालय की कार्रवाई से कानून प्रवर्तन एजेंसियों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।