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डिजिटल गिरफ्तारी जैसी धोखाधड़ी से निपटने में न्यायपालिका सक्रिय: CJI
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा है कि देश की न्यायपालिका उभरती धोखाधड़ी की योजनाओं के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाती है। वह संसद की प्रतीक्षा किए बिना स्वयं इन समस्याओं का समाधान करती है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने दावा किया है कि देश की न्यायपालिका नई प्रकार की धोखाधड़ी की योजनाओं के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाती है। CJI ने कहा कि डिजिटल गिरफ्तारी जैसी धोखाधड़ी के मामलों में न्यायपालिका ने तुरंत हस्तक्षेप किया है।
CJI के अनुसार, भारतीय न्यायपालिका का यह दृष्टिकोण एक व्यापक पैटर्न को दर्शाता है जहां न्यायिक व्यवस्था स्वयं ही उभरती चुनौतियों का समाधान करने के लिए आगे बढ़ती है। वह संसद के कानून बनाने की प्रक्रिया के पूरा होने तक प्रतीक्षा नहीं करते, बल्कि तुरंत कार्रवाई करते हैं।
डिजिटल गिरफ्तारी की धोखाधड़ी में अपराधी आमतौर पर नागरिकों को फोन या इंटरनेट के माध्यम से यह कहकर धमकाते हैं कि वे पुलिस या न्यायिक अधिकारी हैं और उन्हें तुरंत धन भेजना चाहिए। यह धोखाधड़ी की एक अत्यंत प्रभावी किस्म साबित हुई है जो लाखों लोगों को लक्ष्य बनाती है।
CJI का यह बयान न्यायपालिका की भूमिका और उसकी जिम्मेदारियों को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने के लिए किस प्रकार तैयार है और कानूनी प्रणाली में किस तरह की गतिशीलता आवश्यक है।