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H-1B वीजा पर कड़ी निगरानी का समर्थन, लेकिन नवाचार को नुकसान न पहुंचे: FIIDS
भारतीय प्रवासी अध्ययन संस्थान ने H-1B वीजा कार्यक्रम में सुधार के लिए ट्रम्प प्रशासन के कदमों का स्वागत किया है, लेकिन यह सावधानी दी है कि इससे अमेरिकी नवाचार क्षमता प्रभावित न हो।
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भारतीय प्रवासी अध्ययन संस्थान (FIIDS) ने H-1B वीजा आवेदनों पर कड़ी निगरानी का समर्थन करते हुए एक बयान जारी किया है। संस्थान ने कहा है कि यह कदम उचित है, लेकिन इससे अमेरिकी नवाचार और आर्थिक विकास को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
FIIDS की नीति और रणनीति प्रमुख खंडेराव कांड ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि संस्थान ट्रम्प प्रशासन के इरादे की सराहना करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा और H-1B कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकना वास्तव में महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।
कांड ने कहा कि विशेष कौशल वाली नौकरियों को तुरंत घरेलू श्रम बाजार से भरा नहीं जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका की असाधारण प्रतिभा को आकर्षित करने की क्षमता ही उसे विश्व का अग्रणी नवाचार अर्थव्यवस्था बनाती है।
यह बयान राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा H-1B वीजा कार्यक्रम पर निगरानी बढ़ाने के कुछ घंटों बाद आया है। प्रशासन का दावा है कि इस कार्यक्रम का दुरुपयोग IT आउटसोर्सिंग कंपनियों सहित कुछ नियोक्ताओं द्वारा व्यापक रूप से किया जा रहा है।