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H-1B वीजा जांच से अमेरिकी नवाचार को नुकसान न हो: भारतीय प्रवासी समूह
भारतीय प्रवासी समूह ने H-1B वीजा कार्यक्रम में कड़ी निगरानी का स्वागत किया है, लेकिन चेतावनी दी है कि इससे अमेरिकी नवाचार को नुकसान नहीं होना चाहिए। संगठन का कहना है कि विशेष कौशल वाली नौकरियों को तुरंत घरेलू श्रम बाजार से भरा नहीं जा सकता।
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा H-1B वीजा कार्यक्रम में कड़ी निगरानी लागू किए जाने के कुछ घंटों बाद भारत और भारतीय प्रवासी अध्ययन फाउंडेशन (FIIDS) ने अपना बयान जारी किया है। FIIDS के नीति और रणनीति प्रमुख खांडेराव कांड ने कहा कि संगठन अमेरिकी सरकार के राष्ट्रीय हित, आर्थिक सुरक्षा और H-1B कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य की सराहना करता है।
कांड ने कहा कि यह सभी वैध उद्देश्य हैं और सरकार इन्हें पूरा करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि इन लक्ष्यों को हासिल करते समय अमेरिकी नवाचार क्षेत्र को नुकसान नहीं होना चाहिए।
FIIDS के अनुसार, असाधारण प्रतिभा को आकर्षित करने की अमेरिका की क्षमता ही उसे विश्व की अग्रणी नवाचार अर्थव्यवस्था बनाती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अनुसंधान और विकास जैसे क्षेत्रों में उच्च विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, जिसे तुरंत घरेलू श्रम बाजार से पूरा करना हमेशा संभव नहीं होता।
ट्रम्प प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम के दुरुपयोग की शिकायतों को स्वीकार करते हुए कहा है कि कुछ नियोक्ता, विशेषकर आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियां, इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने इसी को ध्यान में रखते हुए वीजा कार्यक्रम में सुधार के उपाय शुरू किए हैं।