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तेल और अमेरिकी प्रतिफल में उछाल से सरकारी बांड में 30 साल का सबसे बड़ा नुकसान
भारतीय सरकारी बांड की प्रतिफल दरें लगातार दसवें सप्ताह बढ़ी हैं क्योंकि उच्च कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी प्रतिफल बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। इसी अवधि में विदेशी मुद्रा भंडार में 65 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है।
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भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों के मूल्य में लगातार गिरावट जारी है, जो तीन दशक में सबसे गंभीर संकट का संकेत दे रहा है। बांड की प्रतिफल दरों में लगातार दसवें हफ्ते की वृद्धि देशीय बाजार में महत्वपूर्ण दबाव का संकेत है।
वैश्विक कारकों ने इस प्रवृत्ति को तेज किया है। कच्चे तेल की कीमतों में बने रहने वाले उच्च स्तर और अमेरिकी सरकारी बांड की प्रतिफल दरों में वृद्धि ने भारतीय निवेशकों का ध्यान विदेशी बाजारों की ओर मोड़ा है। यह वैश्विक मंदी की भावना और संघीय रिजर्व की कड़ी मौद्रिक नीति से उपजी चिंताओं को दर्शाता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट इस दबाव को और गहरा करती है। छह सप्ताह की अवधि में 65 अरब डॉलर का नुकसान भारतीय रुपये पर मूल्यह्रास के दबाव और विदेशी निवेशकों की हिचकिचाहट को दर्शाता है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष वर्तमान चुनौतियों को रेखांकित करती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि तब तक यह दबाव बना रहेगा जब तक वैश्विक परिस्थितियां नरम न हों। घरेलू नीति निर्माताओं के लिए यह अवधि बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि मौद्रिक नीति और राजकोषीय प्रबंधन दोनों को संतुलित करना होगा।