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अमेरिकी वीजा नीति से भारतीय आईटी कंपनियों का सबकॉन्ट्रैक्टिंग खर्च बढ़ा
अमेरिका में वीजा प्रतिबंध और प्रतिभा की कमी के कारण भारतीय आईटी फर्मों को स्थानीय कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। आठ प्रमुख कंपनियों का सबकॉन्ट्रैक्टिंग खर्च राजस्व का 11.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
LSN India ·

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अमेरिकी वीजा नीति के प्रभाव स्पष्ट दिखने लगे हैं। आठ प्रमुख आईटी कंपनियों के लिए सबकॉन्ट्रैक्टिंग की लागत बढ़कर उनके कुल राजस्व का 11.3 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है।
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से अमेरिका में कुशल पेशेवरों के लिए वीजा प्राप्त करने में कठिनाइयों के कारण हुई है। पीईआरएम (प्राइमेसी इफेक्ट रिक्रूटमेंट मैटर) प्रक्रिया में विलंब और अन्य प्रवास संबंधी बाधाओं के चलते भारतीय आईटी कंपनियों को स्थानीय बाजारों में कर्मचारी भर्ती पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है।
सबकॉन्ट्रैक्टिंग की इस वृद्धि के साथ ही आंतरिक लागत प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। कंपनियां इस नई वास्तविकता के अनुसार अपनी कार्यशील रणनीति को ढालने के लिए मजबूर हुई हैं, जहां विदेशी कुशल मानव संसाधन पर पहुंचना पहले जितना आसान नहीं रहा।
इस प्रवृत्ति से भारतीय आईटी उद्योग के लिए लाभदायक और हानिकारक दोनों प्रभाव हो सकते हैं। एक ओर यह घरेलू कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाता है, दूसरी ओर कंपनियों की लाभप्रदता पर सीधा असर डालता है और उन्हें संचालन दक्षता में सुधार के लिए नई रणनीति विकसित करनी पड़ती है।