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अमेरिकी कार्रवाई से पहले ही भारतीय आईटी कंपनियों ने ग्रीन कार्ड आवेदन घटाए
भारतीय आईटी जगत की चार बड़ी कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंध लगने से पहले ही PERM श्रम प्रमाणन आवेदनों में तेजी से कमी की है। वित्तीय वर्ष 2024 के बाद से इन कंपनियों के आवेदन में उल्लेखनीय गिरावट दिखाई दे रही है।
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भारत की शीर्ष आईटी कंपनियों ने अमेरिकी अप्रवास नीति में कड़ाई आने से पहले ही अपनी रणनीति बदल दी थी। एक विश्लेषण में पाया गया है कि जिन चार बड़ी भारतीय आईटी फर्मों को बाद में निलंबित किया गया, उन्होंने वित्तीय वर्ष 2024 से ही ग्रीन कार्ड के लिए PERM श्रम प्रमाणन आवेदन में भारी कमी की।
ये कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति के लिए कर्मचारियों के दीर्घकालीन वीजा और प्रवास पथों पर निर्भर रही हैं। हालांकि, गत वर्ष से इन आवेदनों में गिरावट संकेत देती है कि उद्योग को आने वाली नीतिगत चुनौतियों का पहले से अंदाजा था।
PERM श्रम प्रमाणन प्रक्रिया विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास के लिए आवेदन करने का रास्ता तैयार करती है। इस प्रक्रिया में कमी का अर्थ है कि ये कंपनियां अमेरिकी कार्यबल में दीर्घकालीन निवेश में पीछे हट रही हैं।
भारतीय आईटी क्षेत्र अमेरिका में अपनी मजबूत उपस्थिति के लिए जाना जाता है, लेकिन H-1B और अन्य वीजा श्रेणियों में बढ़ती जांच के बीच ये कदम रणनीतिक समायोजन का संकेत हैं। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार, ये परिवर्तन दीर्घावधि में भारतीय तकनीकी कार्यबल की अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भूमिका को प्रभावित कर सकते हैं।