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भारतीय आईटी कंपनियों ने H-1B वीजा पर निर्भरता में की कमी
नैसकॉम के अनुसार, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी फर्मों ने पिछले दशक में स्थानीय भर्ती बढ़ाई है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित की शिक्षा को मजबूत करने के लिए 1.1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
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भारतीय आईटी उद्योग ने अंतरराष्ट्रीय कुशल कार्यबल के लिए H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है। उद्योग निकाय नैसकॉम के मुताबिक, इस बदलाव को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी फर्मों की दूरदर्शी कार्यनीति का परिणाम माना जा सकता है, जिन्होंने अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति को स्थानीय प्रतिभा के आधार पर मजबूत किया है।
नैसकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आईटी कंपनियों ने अमेरिका में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्र में शिक्षा पाइपलाइन को मजबूत करने के लिए 1.1 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। यह निवेश स्थानीय प्रतिभा विकास और भविष्य की जनशक्ति आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में किया गया है।
हिंदुस्तान की शीर्ष आईटी कंपनियों के इस कदम से यह संकेत मिलता है कि वे अपनी कार्यबल प्रबंधन रणनीति में स्थानीयकरण पर ध्यान दे रही हैं। यह दृष्टिकोण न केवल H-1B वीजा से संबंधित नियामक दबाव को कम करने में मदद करता है, बल्कि अमेरिकी बाजार में दीर्घकालिक विकास के लिए भी अनुकूल है।
प्रस्तावित वीजा शुल्क में वृद्धि के बीच यह विकास महत्वपूर्ण है। उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय आईटी क्षेत्र की यह रणनीतिगत दिशा नीति परिवर्तन के साथ संगति रखते हुए व्यावसायिक सुदृढ़ता भी सुनिश्चित करती है।