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न्यायपालिका को आत्मचिंतन की जरूरत: न्यायाधीश वेंकटेश
मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा कि विधि व्यवसाय वाणिज्यिक नहीं बल्कि सेवा-केंद्रित है। उन्होंने न्यायपालिका की तटस्थता को बहाल करने के लिए आत्मचिंतन का आह्वान किया।
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मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एन. वेंकटेश ने कहा है कि न्यायपालिका एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है और अपनी निष्पक्षता को बहाल करने के लिए गहन आत्मचिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कानूनी पेशे की मूल विशेषताओं पर जोर देते हुए कहा कि यह एक वाणिज्यिक व्यवसाय नहीं बल्कि समाज के प्रति सेवा-केंद्रित है।
न्यायाधीश वेंकटेश के अनुसार, वकीलों से अपेक्षा की जाती है कि वे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में निडर रहें और कानून का शासन स्थापित करने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने माना कि कानूनी पेशेवरों की जिम्मेदारी केवल व्यावसायिक हित तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के न्यायिक ढांचे को मजबूत रखना उनका कर्तव्य है।
उनकी टिप्पणियां न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई हैं। न्यायाधीश ने इस बात पर बल दिया कि न्यायालय की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए सभी हितधारकों को अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्व-समीक्षा के माध्यम से न्यायपालिका अपने मूल उद्देश्य को पुनः प्राप्त कर सकती है।