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तेल की कीमत $100 के करीब, बाजार में अस्थिरता का असर
हार्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें $100 के स्तर के करीब पहुंच गई हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार में खुलते समय मंदी का दृश्य दिखाई दे रहा है।
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कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। हार्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिका और ईरान द्वारा तेल वाहक जहाजों पर हमलों की खबरें आ रही हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। यह क्षेत्र विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
भारतीय शेयर बाजारों पर इसका सीधा असर देखा जा रहा है। संवेदनशील सूचकांक (सेंसेक्स) और निफ्टी50 दोनों ही खुलते समय सपाट रुख दिखाने की उम्मीद जताई जा रही है। कच्चे तेल की कीमतें भारत के आयात बिलों को प्रभावित करती हैं और मुद्रास्फीति पर दबाव डाल सकती हैं।
वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल है। निवेशक तेल की आपूर्ति में किसी भी व्यवधान की संभावना को लेकर सावधान हैं। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजारों की चाल को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि तेल की कीमतें यदि $100 से ऊपर चली जाती हैं तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में हार्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति के विकास पर गहरी निगरानी रखी जाएगी।