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भारतीय मूल के सीईओ को विलासितापूर्ण उपहारों का चुकाया जाना रद्द
अमेरिका में एक भारतीय मूल के कार्यकारी को अपनी पूर्व प्रेमिका को दिए गए 370,000 डॉलर के विलासितापूर्ण उपहारों की राशि वापस पाने के मामले में अदालत से झटका लगा है। न्यायिक निर्णय के अनुसार, यह राशि एक तरफा उपहार के रूप में दी गई थी।
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चंदर अग्रवाल नाम का एक भारतीय-अमेरिकी कार्यकारी हाल ही में एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले में हार गया है। उन्होंने अपनी पूर्व प्रेमिका से 370,000 डॉलर की राशि वापस पाने के लिए मुकदमा दायर किया था, जो उन्होंने विभिन्न विलासितापूर्ण उपहारों पर खर्च की थी।
अदालत के फैसले में यह माना गया कि सीईओ ने जो भी राशि खर्च की थी, वह पूरी तरह से स्वैच्छिक उपहार के रूप में दी गई थी। न्यायिक दृष्टिकोण से, ऐसी परिस्थितियों में उपहार देने वाले पक्ष को बाद में उसे वापस पाने का कानूनी अधिकार नहीं होता है।
यह मामला विलासितापूर्ण संबंधों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अदालतें आमतौर पर यह देखती हैं कि क्या राशि पूर्ण रूप से उपहार के रूप में दी गई थी या फिर किसी शर्त के साथ।
यह फैसला दोनों पक्षों के बीच एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है, जिसमें अग्रवाल ने तर्क दिया था कि दिए गए पैसे को ऋण माना जाए। हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।