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भारतीय मूल के संस्थापक ने साझा किया परफेक्शन की चाहत में संघर्ष की कहानी
अमेरिका में भारतीय परिवार के बच्चों के बीच अकादमिक दबाव की समस्या को लेकर एक उद्यमी ने अपने निजी अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें पहली बार 89 अंक मिलने पर रोना आ गया था।
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अमेरिका में भारतीय मूल के एक शीर्ष संस्थापक ने हाल ही में अपनी शिक्षा के दौरान झेले गए अकादमिक दबाव की कहानी सार्वजनिक की है। उन्होंने कहा कि 'ब्राउन किड्स' को परिपूर्णता हासिल करने के लिए कितनी कठिन मेहनत करनी पड़ती है, यह बात उनके निजी अनुभवों से स्पष्ट है।
उद्यमी के अनुसार, स्कूली जीवन में उन्हें हमेशा सर्वोत्तम अंक लाने का दबाव महसूस होता था। उन्होंने विश्लेषण किया कि कैसे भारतीय मूल के परिवार अपने बच्चों से परीक्षा में उच्चतम प्राप्तांक की अपेक्षा रखते हैं और यह मानसिक दबाव किशोरों और युवाओं को प्रभावित करता है।
इस प्रसिद्ध उद्यमी ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि जब उन्हें पहली बार 100 में से 89 अंक मिले, तो उन्हें गहरा निराशा हुई और वह रो पड़े। यह घटना उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण क्षण साबित हुई जिसने उन्हें समझदारी प्रदान की।
उन्होंने युवाओं और अभिभावकों को संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास उससे भी अधिक आवश्यक है। इस तरह के विचार अक्सर दक्षिण एशियाई समुदाय में अकादमिक सफलता के दबाव को लेकर होने वाली चर्चा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।