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भारतीय संस्थापकों की विदेशी सफलता: 205 यूनिकॉर्न विश्वभर में
प्रॉसस-डीलरूम के नए सूचकांक से पता चलता है कि भारत में पले-बढ़े संस्थापक विदेशों में विशाल व्यावसायिक साम्राज्य और संपत्ति का निर्माण कर रहे हैं। भारत में 102 यूनिकॉर्न के मुकाबले विश्वभर में 205 ऐसी कंपनियां भारतीय संस्थापकों द्वारा संचालित हैं।
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एक नए शोध अध्ययन ने भारतीय संस्थापकों की विश्वव्यापी सफलता के आश्चर्यजनक आयाम को उजागर किया है। प्रॉसस और डीलरूम द्वारा तैयार किए गए इस सूचकांक के अनुसार, भारत में पले-बढ़े संस्थापक विश्वभर में 205 यूनिकॉर्न कंपनियों का संचालन कर रहे हैं, जबकि भारत में इनकी संख्या 102 है। यह आंकड़ा भारतीय उद्यमशीलता की शक्ति और वैश्विक आकांक्षा को दर्शाता है।
यह विश्लेषण दर्शाता है कि भारतीय संस्थापक केवल देश में ही नहीं, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और अन्य एशियाई देशों में भी उल्लेखनीय मूल्य सृजन कर रहे हैं। इन विदेशी उद्यमों का कुल मूल्यांकन 560 बिलियन डॉलर के करीब है, जो भारतीय प्रतिभा की अंतरराष्ट्रीय मांग को प्रतिबिंबित करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय संस्थापकों की यह सफलता तकनीकी कौशल, व्यावसायिक समझ और नवाचार की क्षमता का परिणाम है। ये उद्यमी विभिन्न क्षेत्रों में, विशेषकर प्रौद्योगिकी और डिजिटल व्यवसायों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
यह प्रवृत्ति भारत के लिए सकारात्मक और नकारात्मक दोनों संकेत प्रस्तुत करती है। एक ओर, यह देश की शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था की गुणवत्ता को दर्शाता है। दूसरी ओर, यह भारत में व्यावसायिक माहौल और निवेश के अवसरों में सुधार की आवश्यकता की ओर भी इशारा करता है।