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रेलवे ट्रैक पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बढ़ेगी सुरक्षा, पहिए के दोष और हाथियों की मौत में कमी आएगी
भारतीय रेलवे ने ट्रैक, ट्रेनों और स्टेशनों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग शुरू किया है। इस तकनीक से ट्रेन के पहियों के दोष समय पर पकड़े जा सकेंगे और वन्यजीवन, विशेषकर हाथियों की टकराव से मौत को रोका जा सकेगा।
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भारतीय रेलवे अपनी सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का दायरा बढ़ा रहा है। इस नई तकनीक को ट्रैक, चलती ट्रेनों और स्टेशनों में स्थापित किया जा रहा है ताकि संभावित खतरों को समय पर चिन्हित किया जा सके।
एआई प्रणाली का एक प्रमुख उद्देश्य ट्रेन के पहियों में आने वाले दोषों को तुरंत पहचानना है। समय पर इन दोषों का पता चलने से ट्रेन दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह तकनीक पहियों की स्थिति का निरंतर निरीक्षण करती है और किसी भी असामान्यता की सूचना तत्काल देती है।
इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग वन क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रेनों के मार्गों पर हाथियों और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी का पता लगाने में भी किया जा रहा है। इस व्यवस्था से ट्रेन ड्राइवरों को पहले से ही सचेत किया जा सकता है, जिससे वन्यजीवों के साथ टकराव की घटनाओं में कमी आ सकती है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह एक व्यापक सुरक्षा पहल है जो यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी ध्यान में रखती है। आने वाले समय में इस तकनीक को रेलवे नेटवर्क के अन्य हिस्सों में भी विस्तारित किए जाने की योजना है।