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समर्पित माल परिवहन गलियारों से रेलवे का कार्गो आधार बढ़ रहा है
भारतीय रेलवे के 2,843 किलोमीटर लंबे समर्पित माल परिवहन नेटवर्क के पूरी तरह संचालन में आने से कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों की ढुलाई में तेजी आ रही है। नीति सुधारों के साथ मिलकर यह बदलाव रेलवे के कार्गो आधार को व्यापक बना रहा है।
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भारतीय रेलवे के समर्पित माल परिवहन गलियारों (डीएफसी) का पूर्ण परिचालन अब सामग्री ढुलाई के क्षेत्र में एक नया मोड़ ला रहा है। 2,843 किलोमीटर की इस नेटवर्क के माध्यम से कोयला, लौह अयस्क सहित विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की ढुलाई में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
राष्ट्रीय महत्व के इस अवसंरचना प्रकल्प ने भारतीय रेलवे को अधिक प्रतिस्पर्धी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समर्पित गलियारों की सुविधा से माल परिवहन में देरी कम हुई है और परिवहन लागत में भी कमी आई है।
रेलवे प्रशासन द्वारा किए गए हाल के नीति सुधारों ने इस गति को और तेज किया है। भाड़े की संरचना में बदलाव और विभिन्न कमोडिटी के लिए लचीली दरों की व्यवस्था से अधिक से अधिक निजी उद्योग रेलवे के माध्यम से माल परिवहन करने को प्रोत्साहित हो रहे हैं।
इस सकारात्मक प्रवृत्ति से न केवल भारतीय रेलवे की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि देश की परिवहन दक्षता में भी सुधार आ रहा है। विশेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में माल परिवहन क्षेत्र में यह गति और भी तेज होगी।