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भारतीय रेलवे 99.6 प्रतिशत विद्युतीकृत, फिर भी डीजल से नहीं छुट पा रहा
भारतीय रेलवे नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है, लेकिन डीजल इंजनों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। तकनीकी और आर्थिक चुनौतियां इस लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा बन रही हैं।
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भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क के विशाल हिस्से को विद्युतीकृत कर लिया है, जो इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। हालांकि, संपूर्ण नेटवर्क से डीजल इंजनों को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य अभी दूर है। विद्युतीकृत रेलवे ट्रैकों के बावजूद, डीजल इंजन अभी भी रेलवे परिचालन का एक महत्वपूर्ण अंग बने हुए हैं।
इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। कुछ दूरदराज और कम यातायात वाले क्षेत्रों में विद्युतीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं माना जाता है। ऐसे इलाकों में डीजल लोकोमोटिव का उपयोग जारी रखना अधिक किफायती साबित होता है।
इसके अलावा, माल ढुलाई के लिए भारी डीजल इंजनों की मांग बनी हुई है क्योंकि विद्युत लाइनें अभी भी सभी कार्गो रूटों को कवर नहीं करती हैं। भारतीय रेलवे को इन विभिन्न क्षेत्रों में सेवा प्रदान करने के लिए मिश्रित शक्ति स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
विद्युतीकरण में हाल की प्रगति सराहनीय है, लेकिन संपूर्ण डीजल-मुक्त परिवहन नेटवर्क की ओर यात्रा अभी भी लंबी है। नई तकनीकों और बेहतर बैटरी समाधानों के विकास के साथ ही इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल किया जा सकेगा।