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दिवाली-छठ पर रेलवे में भीड़ का संकट, यात्रियों को मिली अमानवीय परिस्थितियां
दिवाली और छठ पर्व पर घर लौटने की जल्दबाजी में ट्रेनों में भीड़ इतनी बढ़ गई कि यात्रियों को सीट तो क्या, खड़े होने की जगह भी नहीं मिल रही। ट्रेन के गेट, खिड़की और यहां तक कि शौचालय में भी यात्री अपना सफर पूरा करने को मजबूर हो रहे हैं।
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देशभर में दिवाली और छठ पर्व के दौरान रेलवे नेटवर्क पर यात्री भीड़ का संकट गहरा गया है। त्योहार पर घर लौटने की चाहत में लाखों यात्री ट्रेनों में सवार हो रहे हैं, जिससे रेलवे की सामर्थ्य से कहीं अधिक भीड़ हो गई है। परिणामस्वरूप ट्रेनों में बैठने की तो बात ही दूर, खड़े होने की जगह तक सीमित हो गई है।
भीड़ की विकरालता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि यात्री ट्रेन के गेट पर लटककर, खिड़कियों पर बैठकर और यहां तक कि शौचालय में अपना सफर पूरा करने को विवश हो रहे हैं। कुछ यात्रियों ने बेडशीट और कपड़ों का उपयोग करके झूले बनाने तक की कोशिश की है ताकि वे किसी तरह अपनी यात्रा पूरी कर सकें। यह स्थिति यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
रेलवे प्रशासन के लिए यह समय मानवीय संकट प्रबंधन की परीक्षा बन गया है। पर्व के मौसम में ट्रेनों की क्षमता और यात्रियों की बढ़ती मांग के बीच का अंतराल हर साल का एक स्थायी समस्या बनकर उभर रहा है। इस भीड़ से निपटने के लिए रेलवे को अपनी रणनीति में तेजी से सुधार करने की जरूरत है ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा का अनुभव मिल सके।