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भारतीय रिफाइनरियों ने रूस पर प्रतिबंधों से पहले ही तैयारी कर ली
भारतीय तेल रिफाइनरियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित असर को ध्यान में रखते हुए समय से पहले ही अपने जोखिम को कम करना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा दिया गया किसी भी राहत का असर अस्थायी ही रहेगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सितंबर के मध्य में लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रूस और ईरान एक्ट पर हस्ताक्षर किए जाने से पहले ही भारतीय रिफाइनरियां अपने बिजनेस मॉडल को पुनर्व्यवस्थित कर रही हैं। इस कानून से रूस पर और अधिक प्रतिबंध लागू होने की संभावना है, जिससे भारतीय तेल शोधन क्षेत्र को सीधा प्रभाव पड़ेगा। भारत पिछले कई वर्षों से रूसी कच्चे तेल पर निर्भर रहा है, विशेषकर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने पहले से ही अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। वे वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीद रही हैं और अपनी इन्वेंटरी को समायोजित कर रही हैं ताकि अचानक प्रतिबंधों का सामना करते समय उन्हें अधिक नुकसान न उठाना पड़े।
विश्लेषकों का अनुमान है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा प्रदान की जाने वाली कोई भी अस्थायी राहत या छूट केवल सीमित समय के लिए ही कारगर साबित होगी। इसका अर्थ यह है कि भारतीय रिफाइनरियों को दीर्घकालीन समाधान खोजने में और भी अधिक प्रयास करने होंगे।
भारतीय तेल उद्योग के हलकों में माना जा रहा है कि वर्तमान परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होंगी, लेकिन समय से पहले की तैयारी से रिफाइनरियों को आने वाले संकट को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलेगी।