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भारतीय तेल कंपनियां पश्चिम एशिया से कच्चे तेल का आयात कम करने की तैयारी में
ईरान में संघर्ष के बीच भारतीय रिफाइनरियां अपने वार्षिक समझौतों के तहत पश्चिम एशियाई कच्चे तेल के आयात में कटौती करने पर विचार कर रही हैं। परंपरागत रूप से भारत अपनी वार्षिक जरूरत का आधे से अधिक कच्चा तेल इसी क्षेत्र से आयात करता रहा है।
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भारतीय तेल परिष्करण उद्योग पश्चिम एशिया से कच्चे तेल के आयात पर पुनर्विचार कर रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। देश की प्रमुख तेल कंपनियां अपने दीर्घकालीन वार्षिक आपूर्ति समझौतों में संभावित कटौती की रूपरेखा तैयार कर रही हैं।
पारंपरिक रूप से भारतीय रिफाइनरियां अपनी कुल वार्षिक कच्चे तेल की आवश्यकता का 50 प्रतिशत से अधिक पश्चिम एशिया से प्राप्त करती हैं। इस क्षेत्र की निकटता और भारी, अधिक सल्फर युक्त तेल ग्रेड की उपलब्धता के कारण भारत इसी बाजार पर निर्भर रहा है। हालांकि, वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में भारतीय रिफाइनरियां आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों को कम करने के लिए अपने आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपना रही हैं।
इस रणनीतिक बदलाव से भारतीय तेल आयातकर्ता अन्य तेल उत्पादक देशों की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसा करने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होगी और संभावित आपूर्ति व्यवधानों से बचाव मिलेगा। तेल परिष्करण क्षेत्र के लिए आपूर्ति विविधता एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है जो भारत की दीर्घकालीन ऊर्जा नीति को प्रभावित करेगा।