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सातवीं कक्षा की छात्रा ने माइक्रोप्लास्टिक हटाने का नया तरीका खोजा
एक भारतीय स्कूल छात्रा के अनुसंधान से पता चला है कि साधारण सामग्री का उपयोग करके पानी से माइक्रोप्लास्टिक को 93.3 प्रतिशत तक हटाया जा सकता है। इस खोज को पूरा करने में मात्र 60 मिनट का समय लगा।
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पर्यावरणीय प्रदूषण के विरुद्ध युवा पीढ़ी की जागरूकता का एक उदाहरण सामने आया है, जब एक सातवीं कक्षा की छात्रा ने माइक्रोप्लास्टिक को जल से अलग करने का एक प्रभावी तरीका विकसित किया है। इस अभिनव प्रयोग में उपयोग की गई सामग्री सरल और सुलभ है, जो इसे व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए संभावित बनाती है।
छात्रा के शोध के अनुसार, उनके द्वारा खोजी गई विधि पानी से 93.3 प्रतिशत माइक्रोप्लास्टिक कणों को केवल 60 मिनट में हटाने में सक्षम है। यह उपलब्धि जल शुद्धिकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां उन्नत प्रौद्योगिकी तक पहुंच सीमित है।
माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण एक वैश्विक समस्या बन गया है, जो पीने के पानी, समुद्री जीवन और मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। इस युवा शोधकर्ता की खोज बताती है कि कैसे स्कूली छात्र भी विज्ञान के माध्यम से वास्तविक समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकते हैं।
यह प्रयोग छात्रों को प्रेरित करता है कि वे अपने आसपास की समस्याओं पर गौर करें और वैज्ञानिक तरीकों से उनका समाधान खोजें। पर्यावरण संरक्षण में ऐसी युवा प्रतिभा का महत्व अधिक है।