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कामकाजी महिलाओं पर दोहरा बोझ: नौकरी के साथ घर की जिम्मेदारी
भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन घरेलू कार्यों का बंटवारा अभी भी परंपरागत ढर्रे पर ही है। नई रिपोर्ट से पता चलता है कि महिलाएं पेशेवर और घरेलू दोनों क्षेत्रों में असमान बोझ उठा रही हैं।
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भारतीय महिलाओं के कार्यबल भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, घरेलू जिम्मेदारियों का वितरण पारंपरिक पैटर्न पर ही बना हुआ है। एक व्यापक रिपोर्ट के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि महिलाएं अपनी नौकरी के साथ-साथ रसोई, बच्चों की देखभाल और अन्य घरेलू कार्यों की मुख्य जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
आंकड़ों से पता चलता है कि भले ही महिलाएं घर से बाहर आय अर्जित कर रही हैं, किंतु पारिवारिक कर्तव्यों में पुरुषों की भागीदारी न के बराबर बनी हुई है। इससे महिलाओं के समय प्रबंधन में भारी चुनौती पैदा हुई है, जिसका सीधा असर उनकी कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
वेतन और अवकाश के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से पिछड़ी हुई हैं। रिपोर्ट दर्शाती है कि समान योग्यता और अनुभव होने के बावजूद महिलाओं को कम वेतन मिलता है और उन्हें अपनी व्यक्तिगत समय के लिए भी पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस स्थिति में सुधार के लिए सामाजिक सोच में परिवर्तन और कार्यस्थल पर लैंगिक समानता की नीतियों को मजबूत किया जाना आवश्यक है। केवल कानूनी प्रावधान ही नहीं, बल्कि घरेलू स्तर पर जिम्मेदारियों का साझा बंटवारा भी महत्वपूर्ण है।