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डिजिटल युग में चेहरा किराए पर देना बना आमदनी का नया जरिया
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विज्ञापन क्षेत्र में मानवीय चेहरों की बढ़ती मांग ने एक नया व्यावसायिक अवसर तैयार किया है। बैंक कर्मचारियों सहित सामान्य लोग अपने चेहरे का डेटा लाइसेंस देकर महीनों में हजारों रुपये कमा रहे हैं।
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भारत में एक नया ट्रेंड उभरा है जहां लोग अपने चेहरों को डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किराए पर दे रहे हैं। एक बैंक कर्मचारी ने मात्र 72 घंटे में 31,000 रुपये अर्जित किए हैं, जिससे यह व्यावसायिक मॉडल सामान्य जनता के बीच लोकप्रिय हो गया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सामग्री निर्माण और डिजिटल विज्ञापन उद्योग में असली मानवीय चेहरों की मांग में तीव्र वृद्धि हुई है। विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को उनकी बायोमेट्रिक जानकारी साझा करने के बदले आर्थिक प्रतिफल दे रहे हैं। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पेशेवरों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन गया है।
हालांकि यह आय का एक आकर्षक माध्यम प्रतीत होता है, विशेषज्ञ व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के संबंध में आशंका व्यक्त कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा कानूनों का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्मों पर साइन अप करना दीर्घकालिक जोखिम पैदा कर सकता है।
विनियामक निकायों ने ऐसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने का संकेत दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों की सहमति पूरी तरह सूचित हो और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए।