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भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पानी में रहेंगी अधिक समय तक
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने गुजरात के हजीरा में अपनी स्वदेशी वायु-स्वतंत्र प्रणोदन तकनीक का दूसरा चरण शुरू किया है। यह तकनीक भारतीय पनडुब्बियों की जलमग्न संचालन क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार लाएगी।
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भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। डीआरडीओ ने हजीरा में अपनी स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) प्रणाली का सेटिंग टू वर्क फेज-2 औपचारिक रूप से शुरू किया है। यह प्रौद्योगिकी भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों की पानी के अंदर रहने की अवधि को काफी हद तक बढ़ाएगी।
एआईपी प्रणाली पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आने की आवश्यकता को कम करती है। इस तकनीक से पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के अंदर रह सकती हैं, जिससे उनकी गोपनीयता और परिचालन प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि होती है। यह क्षमता आधुनिक समुद्री सुरक्षा परिदृश्य में भारतीय नौसेना की स्थिति को मजबूत करेगी।
डीआरडीओ के इस विकास के अनुसार, इस प्रणाली को भारतीय नौसेना की कलवारी क्लास की पनडुब्बियों में 2027 तक एकीकृत करने की योजना है। यह एकीकरण भारत के पनडुब्बी बेड़े को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।