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इंदौर जल संदूषण मामले में संस्थागत विफलता का दोष: न्यायिक पैनल
इंदौर में जल संदूषण से हुई मौतों की जांच में न्यायिक पैनल ने कहा कि यह त्रासदी रोकी जा सकती थी। पैनल ने नगर निगम के पूर्व अधिकारियों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
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इंदौर के जल संदूषण कांड की जांच करने वाले न्यायिक पैनल ने गंभीर संस्थागत विफलता का पता लगाया है। पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन इंदौर नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त (जल आपूर्ति) रोहित सिसोनिया और तत्कालीन कार्यकारी अभियंता (जल आपूर्ति) संजीव श्रीवास्तव इस त्रासदी के लिए प्राथमिक रूप से उत्तरदायी हैं।
जांच से पता चलता है कि विभिन्न स्तरों पर लगातार देरी और लापरवाही के कारण यह दुर्घटना घटी। न्यायिक पैनल ने स्पष्ट किया है कि समय पर कार्रवाई और सुचारु संस्थागत तंत्र से इस त्रासदी को रोका जा सकता था। रिपोर्ट में प्रशासनिक स्तर पर गंभीर खामियों का भी उल्लेख किया गया है।
इंदौर का जल संदूषण कांड राज्य में जनस्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करता है। पैनल की इस निष्कर्ष से संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही के सवाल उठे हैं। इस मामले से जुड़े आगे के कानूनी कदमों की प्रत्याशा है।