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माइक्रोफाइनेंस संकट पार, दूसरी तिमाही से बढ़ोतरी की उम्मीद: इंडसइंड
इंडसइंड बैंक के प्रबंध निदेशक राजीव आनंद ने कहा है कि माइक्रोफाइनेंस व्यवसाय का कठिन दौर अब पीछे छूट गया है। दूसरी तिमाही से इस सेगमेंट में वृद्धि दिखने की संभावना है।
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इंडसइंड बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी राजीव आनंद ने कहा है कि माइक्रोफाइनेंस व्यवसाय के संकट का दौर समाप्त हो गया है और जोखिम अब सकारात्मक दिशा में कम हो रहा है। उन्होंने बताया कि दूसरी तिमाही से इस व्यवसाय में वृद्धि की वापसी होनी चाहिए।
बैंक को 2025 में अपनी माइक्रोफाइनेंस सहायक कंपनी भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड (बीएफआईएल) को लेकर गंभीर प्रशासनिक और लेखांकन संकट का सामना करना पड़ा। बैंक ने वित्त वर्ष 2025 में गलत तरीके से मान्यता दी गई संचयी ब्याज आय में 674 करोड़ रुपये का संशोधन किया। इसके अतिरिक्त, 172 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई जिसमें कर्मचारियों ने माइक्रोफाइनेंस व्यवसाय में इसे शुल्क आय के रूप में गलत तरीके से दर्ज किया था।
आनंद ने कहा कि माइक्रोफाइनेंस व्यवसाय में उन्हें काफी कठिन समय आया है, लेकिन वह सब अब पीछे रह गया है। उन्होंने कहा कि जोखिम प्रबंधन वर्तमान में काफी अच्छी तरह काम कर रहा है।
माइक्रोफाइनेंस विभाग का एक सफल व्यवसाय 'भारत सुपरस्टोर' है, जहां किराना दुकानों और छोटे व्यवसायों को ऋण दिया जाता है। बैंक के प्रबंधन का मानना है कि इस संकट के बाद से संगठनात्मक सुधारों के बाद अगली तिमाही में वृद्धि का रुझान दिखेगा।