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वनों की कटाई के लिए क्षतिग्रस्त वनों पर वनरोपण का प्रस्ताव
औद्योगिक संगठन वन-समृद्ध राज्यों में निजी परियोजनाओं को क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों पर दोगुने क्षेत्र में वनरोपण करने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं। यह प्रस्ताव तब लागू होगा जब गैर-वन भूमि उपलब्ध न हो।
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भारतीय उद्योग जगत ने सरकार से वन संरक्षण नियमों में संशोधन की अपील की है। उद्योग निकायों का कहना है कि जब परियोजनाओं के लिए गैर-वन भूमि उपलब्ध न हो, तो क्षतिग्रस्त वनों पर मुआवजे के रूप में वनरोपण किया जा सकता है।
इस प्रस्ताव के अनुसार, निजी परियोजनाएं अपने द्वारा आवंटित वन क्षेत्र के मुकाबले दोगुने क्षेत्र में वन लगा सकेंगी। यह व्यवस्था खासतौर पर वन-समृद्ध राज्यों में लागू करने की बात कही जा रही है, जहां गैर-वन भूमि की उपलब्धता सीमित है।
उद्योग जगत का तर्क है कि क्षतिग्रस्त वनों पर वनरोपण कार्यक्रम पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी होगा। इससे बंजर पड़ी भूमि को फिर से वनाच्छादित किया जा सकेगा और वनों की पुनर्स्थापना में तेजी आएगी।
वर्तमान में, वन संरक्षण अधिनियम के तहत निजी परियोजनाओं को वन भूमि के उपयोग के लिए मुआवजे के रूप में गैर-वन भूमि पर वनरोपण करना अनिवार्य है। उद्योग पक्ष इस प्रावधान में लचीलापन लाने की मांग कर रहा है ताकि वन विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ सके।