Business · India Bureau
तेल कंपनियां मीठे पानी की जगह उपचारित जल का करेंगी इस्तेमाल
हिंदू सस्टेनेबिलिटी समिट में विशेषज्ञों ने अपशिष्ट जल को आर्थिक संसाधन के रूप में देखने का आह्वान किया है। चेन्नई के समुद्र तटीय क्षेत्र का लाभ उठाते हुए विलवणीकरण को सस्ता विकल्प बताया गया है।
LSN India ·

हिंदू सस्टेनेबिलिटी समिट में बड़ी तेल कंपनियां ताजे पानी के सेवन को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसके बजाय वे उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग करने पर विचार कर रही हैं, जिससे जल संकट को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पद्धति को अपनाकर उद्योग जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समिट में एक विशेषज्ञ ने विलवणीकरण प्रक्रिया को लेकर व्याप्त गलतफहमी को दूर किया। उन्होंने कहा कि विलवणीकरण महंगा नहीं है और चेन्नई जैसे तटीय शहरों के लिए यह एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है। समुद्री संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करके शहर अपनी जल आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है।
आईआईटी मद्रास के एक प्रोफेसर ने भूजल की स्थिति की निगरानी में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकें भूजल स्तर और गुणवत्ता की वास्तविक समय जानकारी प्रदान कर सकती हैं। इससे जल प्रबंधन में सुधार करने और भविष्य की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों ने अपशिष्ट जल को आर्थिक दृष्टिकोण से भी लाभप्रद माना है। जब उपचारित जल को फिर से उपयोग किया जाता है, तो यह न केवल पानी बचाता है बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्रदान करता है। ऐसे समग्र दृष्टिकोण को अपनाकर उद्योग और शहर दोनों टिकाऊ विकास के लक्ष्य की ओर बढ़ सकते हैं।