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असंगठित अर्थव्यवस्था में केंद्रीकरण की समस्या, जिला स्तरीय डेटा से उजागर

भारत में असंगठित क्षेत्र की अर्थव्यवस्था कुछ जिलों में अत्यधिक केंद्रित पाई गई है। नए जिला-स्तरीय आकलन से यह पैटर्न स्पष्ट हुआ है कि श्रम और आय असमान रूप से वितरित है।

LSN India · 22 September 2026

असंगठित अर्थव्यवस्था में केंद्रीकरण की समस्या, जिला स्तरीय डेटा से उजागर

देश के विभिन्न जिलों में किए गए विस्तृत आकलन से पता चलता है कि असंगठित अर्थव्यवस्था कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में अत्यधिक सांद्रित है। यह संरचनात्मक असमानता रोजगार के अवसरों और आय वितरण को प्रभावित कर रही है।

जिला-स्तरीय डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी इलाकों और औद्योगिक केंद्रों में असंगठित क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की सर्वाधिक एकाग्रता है। ये क्षेत्र छोटे व्यवसायों, दैनिक मजदूरी और स्व-नियोजित कार्य में लगे लाखों लोगों को आश्रय प्रदान करते हैं। वहीं, कई दूरस्थ और कृषि प्रधान जिलों में असंगठित क्षेत्र की गतिविधियां सीमित हैं।

नीति निर्माताओं के लिए यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को क्षेत्रीय चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता है। असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के लिए बेहतर संरक्षण और नियामक ढांचे की मांग बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस असमानता को दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर केंद्रीभूत विकास कार्यक्रमों की जरूरत है। कौशल विकास, ऋण सहायता और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने से असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सकता है।