Culture & Entertainment · India Bureau
गणेश विसर्जन के अपशिष्ट को बदला शिक्षा संसाधन में
पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए एक नई पहल गणेश मूर्तियों के अपशिष्ट को स्कूली फर्नीचर में तब्दील कर रही है। 'विसर्जन से विद्या तक' नामक इस परियोजना में तीन हजार किलोग्राम प्लास्टर ऑफ पेरिस से अब तक 760 अध्ययन मेजें बनाई जा चुकी हैं।
LSN India ·

मलहार कालंबे और डॉ. बिनीश देसाई के नेतृत्व में चल रही 'विसर्जन से विद्या तक' परियोजना एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत कर रही है कि कैसे परंपरागत रीति-रिवाजों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जा सकता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर विसर्जित की जाने वाली प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों को एकत्रित कर इसे उपयोगी शिक्षा सामग्री में परिवर्तित किया जा रहा है।
अब तक इस पहल के अंतर्गत 3,000 किलोग्राम अपशिष्ट सामग्री का सदुपयोग करते हुए 760 अध्ययन मेजें तैयार की जा चुकी हैं। ये मेजें विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों को उपलब्ध कराई गई हैं, जहां ये छात्रों के सीखने के माहौल को बेहतर बनाने में मदद कर रही हैं।
इस परियोजना का लक्ष्य केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है। आयोजकों की योजना 2026 तक अपने उत्पादन को 5,000 अध्ययन मेजों तक बढ़ाने की है। साथ ही, वे शिक्षा से जुड़ी अन्य आवश्यक वस्तुएं भी तैयार करने का विचार कर रहे हैं।
यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि सीमित संसाधन वाले स्कूलों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराने का एक सार्थक माध्यम भी बन गई है। ऐसी टिकाऊ और समावेशी विकास की पहल भविष्य की पीढ़ी के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।