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बीमा में सह-भुगतान से स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान नहीं होगा

स्वास्थ्य बीमा में सह-भुगतान की व्यवस्था रोगियों के बोझ को कम करने का दावा करती है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारतीय स्वास्थ्यसेवा प्रणाली की गहरी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती।

LSN India · 7 October 2026

बीमा में सह-भुगतान से स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान नहीं होगा

भारत में स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में सह-भुगतान की नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। इस व्यवस्था के तहत बीमा कंपनियां और बीमित व्यक्ति चिकित्सा खर्च में हिस्सेदारी करते हैं। नीति निर्माता इसे आर्थिक दबाव कम करने का माध्यम बताते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृष्टिकोण सतही है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के विश्लेषकों का तर्क है कि सह-भुगतान की नीति केवल तात्कालिक वित्तीय समस्या का समाधान करती है। भारतीय स्वास्थ्यसेवा प्रणाली के समक्ष वास्तविक चुनौतियां अधिक जटिल हैं। इनमें बुनियादी ढांचे की कमी, कुशल चिकित्सकों की अपर्याप्तता, और सार्वजनिक अस्पतालों में संसाधनों की कमी शामिल है।

विशेषज्ञ दल के अनुसार, बीमा सह-भुगतान से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अधिक प्रभावित होंगे। ये तबके स्वास्थ्य सेवा लेने में पहले से ही सकोच करते हैं। सह-भुगतान की अतिरिक्त बाध्यता उनके लिए चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचना और भी कठिन बना देगी। इससे स्वास्थ्य असमानताएं बढ़ने का जोखिम है।

विशेषज्ञ सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और सरकारी अस्पतालों में निवेश बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। वे मानते हैं कि यह दीर्घकालीन और स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है। भारत को स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता, सामर्थ्य और गुणवत्ता तीनों पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है।