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इंटरनेट से नागरिकों को निगरानी का खतरा: पूर्व ओड़िशा HC प्रमुख
पूर्व उच्च न्यायालय प्रमुख न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े जोखिमों के समाधान के लिए मानवाधिकार संस्थानों के हस्तक्षेप की मांग की है।
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पूर्व ओड़िशा उच्च न्यायालय के प्रमुख न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट के अनियंत्रित उपयोग से नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी का प्रोफाइलिंग और निगरानी का गंभीर खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने माना है कि डिजिटल तकनीकें यद्यपि आधुनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गई हैं, लेकिन ये नई चुनौतियां भी लेकर आई हैं।
न्यायमूर्ति मुरलीधर के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा संग्रहण के तरीके नागरिकों की गोपनीयता के अधिकार को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वर्तमान कानूनी ढांचा इन उदीयमान खतरों से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाता है।
इस स्थिति से निपटने के लिए पूर्व न्यायालय प्रमुख ने मानवाधिकार संस्थानों, नियामक निकायों और सरकारी एजेंसियों के समन्वित हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका मानना है कि एक सुदृढ़ नीतिगत ढांचा विकसित करने की तुरंत जरूरत है जो नागरिकों की डिजिटल गोपनीयता की रक्षा करे।
न्यायमूर्ति मुरलीधर का यह बयान डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के दौरान व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं को प्रतिबिंबित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देशों में यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जहां लाखों लोग प्रतिदिन इंटरनेट का उपयोग करते हैं।