LSN News › India

World · India Bureau

विक्टोरिया झील में नील पर्च ने मछली पालन को बदला, स्थानीय प्रजातियों को खतरे में डाला

विक्टोरिया झील में दशकों पहले प्रवेश किए गए नील पर्च मछली ने न केवल स्थानीय मछली पालन को रूपांतरित किया, बल्कि झील की मूल सिचलिड प्रजातियों के अस्तित्व को गंभीर खतरे में डाल दिया है।

LSN India · 1 October 2026

विक्टोरिया झील में नील पर्च ने मछली पालन को बदला, स्थानीय प्रजातियों को खतरे में डाला

विक्टोरिया झील में नील पर्च मछली के प्रवेश ने अफ्रीका की इस विशाल झील के पारिस्थितिकी तंत्र में गहरे परिवर्तन ला दिए हैं। विदेशी प्रजाति के रूप में लाई गई इस मछली ने स्थानीय मछली पालन उद्योग को नई दिशा दी, लेकिन इसके परिणाम पर्यावरणीय दृष्टि से विनाशकारी साबित हुए।

नील पर्च की शिकारी प्रकृति ने झील में पाई जाने वाली सिचलिड मछलियों की प्रजातियों को लगातार संकट में डाला है। इन देशी प्रजातियों की जैव विविधता में अभूतपूर्व गिरावट दर्ज की गई है, जिससे झील के प्राकृतिक संतुलन पर प्रश्न चिन्ह लगा है।

एक ओर जहां आर्थिक दृष्टि से नील पर्च मछली पालन से स्थानीय समुदायों को रोजगार और आय के नए साधन मिले हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञ इस विदेशी प्रजाति के कारण झील की जैविक विविधता में आने वाले संकट को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

विक्टोरिया झील की यह घटना आक्रामक विदेशी प्रजातियों के अनियंत्रित प्रवेश से होने वाले नुकसान का एक प्रमुख उदाहरण बन गई है। पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी परिस्थितियों को नियंत्रित करने की आवश्यकता को लेकर विशेषज्ञ समुदाय में व्यापक सहमति बन रही है।