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बीमारी से बचने का वादा, 42 साल की मेहनत से बना अद्भुत मंदिर
एक युवा पादरी के प्रण ने आयोवा में एक वैश्विक स्तर के स्मारक का निर्माण करवाया। रिडेम्पशन ग्रोटो को बनाने में सौ से अधिक रेलगाड़ियों के पत्थर का इस्तेमाल हुआ।
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अमेरिका के आयोवा राज्य में स्थित रिडेम्पशन ग्रोटो एक अद्भुत स्थापत्य कृति है जिसका निर्माण एक धार्मिक प्रतिज्ञा से प्रेरित था। जब फादर डॉबरस्टीन एक युवा धर्मसेमिनारी छात्र थे तब उन्हें निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी ने घेरा। इस जानलेवा बीमारी से जूझते हुए उन्होंने एक मंदिर या मठ का निर्माण करने का वादा किया यदि वह बच जाएं।
भाग्यवश फादर डॉबरस्टीन का इलाज सफल रहा और वह स्वस्थ हो गए। अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए उन्होंने इस भव्य स्मारक के निर्माण का बीड़ा उठाया। यह अद्भुत परियोजना 42 वर्षों तक चली और इस दौरान सौ से अधिक रेलगाड़ियों में भरकर विभिन्न प्रकार के पत्थर और भूवैज्ञानिक सामग्री मंगवाई गई।
रिडेम्पशन ग्रोटो को बनाने में अनेक प्रकार की पत्थरों और खनिज पदार्थों का उपयोग किया गया जिससे यह संरचना अपनी भव्यता और जटिल डिजाइन के लिए विख्यात हो गई। यह मानव निर्मित ग्रोटो विश्व के सबसे बड़े ग्रोटो में से एक माना जाता है।
आज यह ऐतिहासिक स्मारक पश्चिम बेंड, आयोवा में एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बन गया है। फादर डॉबरस्टीन की अटूट प्रतिज्ञा और दशकों की कठोर मेहनत का यह फल आज लाखों आगंतुकों को प्रेरित और मुग्ध करता है।