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दशहरे के आयोजन में महिला पुलिस अधिकारी द्वारा AK-47 से फायरिंग, सेना के पूर्व सैनिकों की आलोचना
एक महিला IPS अधिकारी द्वारा दशहरा समारोह के दौरान AK-47 राइफल से की गई फायरिंग को लेकर सेना के सेवानिवृत्त कर्मियों ने गंभीर आपत्ति जताई है। इस घटना को लेकर प्रोटोकॉल और सुरक्षा संबंधी मानदंडों का पालन न करने का आरोप लगाया गया है।
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एक दशहरा समारोह के दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया हथियार प्रदर्शन विवाद का केंद्र बन गया है। सेना के अवकाश प्राप्त अधिकारियों और जवानों ने इस घटना की तीव्र निंदा करते हुए कहा है कि यह कार्य सैन्य प्रोटोकॉल और सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की फायरिंग का सार्वजनिक अनुष्ठान में कोई औचित्य नहीं है। पूर्व सैनिकों ने कहा है कि हथियारों का प्रदर्शन केवल प्रशिक्षण और अधिकृत सैन्य कार्यक्रमों तक सीमित होना चाहिए। उन्होंने इस घटना को एक खतरनाक पूर्वाभास माना है जो नागरिक अनुशासन में कमी को दर्शाता है।
दशहरे के आयोजकों ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की है। हालांकि, पुलिस विभाग से संबंधित सूत्रों का कहना है कि यह प्रदर्शन कार्यक्रम का एक नियोजित हिस्सा था। इसके बाद पुलिस प्रशासन और सैन्य समुदाय के बीच सार्वजनिक स्थानों पर हथियार प्रदर्शन के नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है।
सेना के सेवानिवृत्त सदस्यों का तर्क है कि इस तरह की घटनाएं आम जनता में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं और सामाजिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के विरुद्ध हैं। उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों से इस मामले में कड़े कदम उठाने की अपील की है।