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ईरान युद्ध समाप्ति के लिए सद्भावना से नहीं बातचीत करता था: ट्रम्प के यूएन दूत
अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में नियुक्त दूत ने ईरान पर आरोप लगाया है कि वह यमन में चलने वाले संघर्ष को समाप्त करने के लिए ईमानदारी से वार्ता नहीं कर रहा था। उन्होंने कहा कि ईरान शुरुआत में ही सभी मांगें पूरी करवाना चाहता था।
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संयुक्त राष्ट्र में ट्रम्प प्रशासन के प्रतिनिधि ने यमन संकट को लेकर ईरान की आलोचना करते हुए कहा है कि तेहरान सद्भावना से किसी भी शांति समझौते की ओर आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं था। अमेरिकी दूत ने कहा कि ईरान की ओर से यह रुख प्रदर्शित करता है कि वह वास्तविक समाधान की बजाय तत्काल लाभ हासिल करना चाहता था।
अमेरिकी प्रतिनिधि के अनुसार, ईरान ने जो शर्तें रखी थीं, वे अत्यधिक कठोर और एक तरफा थीं। उन्होंने दावा किया कि तेहरान शुरुआत में ही अपनी सभी मांगें पूरी करवाने पर जोर दे रहा था, जो किसी भी रचनात्मक वार्ता के लिए अनुकूल नहीं था।
यमन में चल रहे संघर्ष में ईरान की भूमिका को लेकर अमेरिका लंबे समय से चिंतित रहा है। वाशिंगटन का मानना है कि तेहरान क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए यमन की स्थिति का फायदा उठा रहा है। ट्रम्प प्रशासन के यूएन दूत की टिप्पणी इस्लामिक गणराज्य के साथ अमेरिकी तनाव को दर्शाती है।
यमन का संकट मानवीय त्रासदी का एक बड़ा कारण बना हुआ है, जहां लाखों नागरिक विस्थापित हुए हैं और खाद्य सुरक्षा की गंभीर समस्या है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र में शांति स्थापना के प्रयास कर रहा है, लेकिन विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद इस लक्ष्य को हासिल करने में बाधा बना हुआ है।