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आतंकवादी या आतंकवाद के शिकार? ईरान के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र में ट्रम्प को चुनौती दी
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्किन ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ तीव्र आलोचना की। उन्होंने 'आतंकवादी' और 'आतंकवाद के पीड़ित' के बीच भेद को लेकर सवाल उठाए।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्किन ने अंतर्राष्ट्रीय मंच से अमेरिकी नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आतंकवाद की परिभाषा क्या है और किसे वास्तव में आतंकवादी माना जाना चाहिए।
पेजेश्किन ने अपने भाषण में ट्रम्प प्रशासन के दौरान अपनाई गई विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई बार शक्तिशाली देश अपने हितों के अनुसार 'आतंकवाद' की परिभाषा तय करते हैं, जिससे वास्तविक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता। ईरानी नेता के अनुसार, कुछ राष्ट्र अपने सहयोगियों के कार्यों को नजरअंदाज करते हैं जबकि विरोधियों को आतंकवादी घोषित कर देते हैं।
यह टिप्पणी मध्य पूर्व में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवाद समर्थक संगठन घोषित किए गए समूहों को लेकर चल रही अंतर्राष्ट्रीय बहस के बीच आई है। पेजेश्किन ने कहा कि पश्चिमी देशों को अपनी नीतियों में दोहरेपन से बचना चाहिए।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की यह घटना उच्च स्तर के राजनीतिक विवाद को दर्शाती है। महासभा में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत आतंकवाद की एक सार्वभौमिक और निष्पक्ष परिभाषा होनी चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के आधार पर बनी परिभाषा।