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इजरायली नेता को खटकी डॉक्यूमेंट्री, तीन साल की खोजी पत्रकारिता का नतीजा
इजरायली सेना और खुफिया तंत्र पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री विदेश में सम्मान पा रही है, लेकिन इजरायली नेतृत्व में इसको लेकर तनाव दिख रहा है। फिल्ममेकरों ने तीन साल की गहन खोजी पत्रकारिता के बाद यह दस्तावेज़ तैयार किया है।
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यह डॉक्यूमेंट्री किसी जल्दबाजी में तैयार किया गया काम नहीं है। फिल्ममेकर अब्राहम और रेचल ने इसके लिए लगभग तीन वर्षों तक निरंतर खोजी पत्रकारिता की है। उनके इस प्रयास में इजरायली सेना और खुफिया एजेंसियों से जुड़े कुल 24 लोगों के साक्षात्कार शामिल हैं।
इन साक्षात्कारों में खुफिया अधिकारियों और सैनिकों के विचार दर्ज किए गए हैं। इन प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित व्यक्तियों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए फिल्ममेकरों ने आधुनिक डिजिटल तकनीकों का सहारा लिया है। साक्षात्कारकर्ताओं की आवाज़ और चेहरे दोनों को ही डिजिटल रूप से परिवर्तित किया गया है ताकि उनकी गोपनीयता बनी रहे।
डॉक्यूमेंट्री को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। हालांकि, इजरायली राजनीतिक नेतृत्व इस फिल्म के प्रदर्शन पर असहज दिख रहा है। इसी कारण स्थानीय स्तर पर इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है।