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भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजीकरण पर ISRO कर्मचारी संघों की चिंता
ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने रॉकेट निर्माण और संचालन को निजी क्षेत्र को सौंपे जाने की खबरों पर स्पष्टता मांगी है। संघों ने संस्था की भूमिका, मौजूदा कर्मचारियों और भर्ती पर इसके असर को लेकर सवाल उठाए हैं।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के कर्मचारी संघों ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के निजीकरण को लेकर सरकार से स्पष्ट नीति बयान की मांग की है। नौ कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से रॉकेट निर्माण और अंतरिक्ष अभियानों के संचालन को निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को स्थानांतरित करने की खबरों पर चिंता व्यक्त की है।
संघों का तर्क है कि ऐसी योजनाओं के बारे में कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों को पहले से सूचित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि निजीकरण प्रक्रिया में ISRO की मूल भूमिका, वर्तमान कार्यबल की सुरक्षा और भविष्य की भर्ती नीति पर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए।
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने की चर्चा पिछले कुछ वर्षों में तेज हुई है। सरकार का लक्ष्य अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को विस्तृत करना और वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं में भारतीय कंपनियों की भूमिका बढ़ाना है।
इस मामले में अधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार चल रहा है। कर्मचारी संघों की चिंता यह सुनिश्चित करना है कि निजीकरण की किसी भी योजना में ISRO की रणनीतिक क्षमता और इसके कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहें।