Business · India Bureau
इतालवी पादरी की मछलियों की बिक्री से बना समुदाय का भविष्य
1970 के दशक में ब्राजील के मराजो द्वीप पर एक इतालवी जेसुइट पादरी ने 12,000 पिरान्हा मछलियों को यूरोप को बेचकर स्थानीय समुदाय के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्त पोषित किया।
LSN India ·

ब्राजील के मराजो द्वीप में 1970 के दशक में आए इतालवी जेसुइट पादरी जियोवन्नी गैलो ने एक अनोखे तरीके से स्थानीय समुदाय के विकास में योगदान दिया। उन्होंने 12,000 पिरान्हा मछलियों को संरक्षित कर यूरोप को निर्यात किया, जिससे प्राप्त धनराशि से द्वीप के निवासियों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण संभव हुआ।
गैलो की इस पहल से द्वीप पर 12 किलोमीटर लंबे पुलों का निर्माण किया गया। इसके अलावा, 8 किलोमीटर लंबी एक हवाई पट्टी का निर्माण भी इसी धनराशि से किया गया। स्थानीय निवासियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने एक कब्रिस्तान, डॉक और अन्य सामुदायिक सुविधाएं भी प्रदान कीं।
गैलो की दूरदर्शी सोच केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रही। उन्होंने मराजो द्वीप के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए मुसेउ डु मराजो का संस्थापन किया। यह संग्रहालय द्वीप के स्थानीय इतिहास और पुरातत्व को प्रदर्शित करता है।
पचास पांच वर्षों के बाद आज गैलो की इस पहल का प्रभाव मराजो द्वीप की प्रगति में स्पष्ट दिखाई देता है। एक धार्मिक व्यक्ति द्वारा शुरू की गई यह परियोजना दर्शाती है कि कैसे सामाजिक उत्तरदायित्व और रचनात्मक सोच से किसी समुदाय का दीर्घकालीन विकास संभव है।