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IVF से जन्मे बच्चों में आनुवंशिक जोखिम, नई स्टडी में खुलासा
वैज्ञानिकों की एक नई खोज में पाया गया है कि कृत्रिम गर्भाधान से पैदा होने वाले बच्चों के डीएनए में 'जंपिंग जीन्स' की मात्रा अधिक होती है। यह आनुवंशिक असामान्यता कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
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नवीनतम शोध के अनुसार, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया के माध्यम से जन्मे बच्चों में ट्रांसपोजेबल एलिमेंट्स अथवा 'जंपिंग जीन्स' की सांद्रता सामान्य से अधिक पाई गई है। ये आनुवंशिक तत्व जीनोम में विभिन्न स्थानों पर स्वयं को पुनः व्यवस्थित करने की क्षमता रखते हैं, जिससे डीएनए की संरचना में परिवर्तन आ सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह आनुवंशिक विसंगति IVF प्रक्रिया के दौरान भ्रूण के विकास के चरण में निर्मित हो सकती है। जब अंडे और शुक्राणु को प्रयोगशाला में संयोजित किया जाता है और पुनः गर्भाशय में रोपित किया जाता है, तो इस कृत्रिम प्रक्रिया में कुछ आनुवंशिक नियंत्रण तंत्र प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंपिंग जीन्स के कारण कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह और तंत्रिका संबंधी विकारों का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, सभी IVF से जन्मे बच्चों में ये समस्याएं अनिवार्य रूप से प्रकट नहीं होंगी, किंतु दीर्घकालीन स्वास्थ्य निगरानी की आवश्यकता हो सकती है।
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में यह खोज महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत में लाखों दंपति प्रजनन उपचार के लिए IVF का सहारा लेते हैं। विशेषज्ञ इस बारे में आगे की गहन शोध की अपील कर रहे हैं ताकि IVF तकनीक को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।