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जादवपुर विश्वविद्यालय ने नेहा बोरा के कार्यक्रम को मंजूरी देने वाली समिति को भंग किया
जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने 7 अक्टूबर को नोटिस जारी कर पुरानी समिति को भंग कर दिया है। उसके स्थान पर आठ नए सदस्यों की नई समिति का गठन किया गया है।
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कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति चिरंजीब भट्टाचार्य ने विवादास्पद निर्णय लेते हुए विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण समिति को भंग कर दिया है। यह समिति नेहा बोरा के नाम से जुड़े एक छात्र कार्यक्रम को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार थी। इस कदम का उद्देश्य संस्था के आंतरिक प्रशासन में सुधार लाना बताया जा रहा है।
7 अक्टूबर को जारी किए गए आधिकारिक नोटिस के अनुसार, पूर्ववर्ती समिति को विघटित कर दिया गया है। इसके तहत आठ नए सदस्यों की एक नई समिति का गठन किया गया है जो भविष्य में इस तरह के निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार होगी। नई समिति में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं।
इस निर्णय के पीछे विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि पुरानी समिति में प्रक्रिया संबंधी खामियां थीं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता थी। नई समिति को अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कदम विश्वविद्यालय के भीतर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। जादवपुर विश्वविद्यालय, भारत के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और इसके आंतरिक प्रशासन में किए गए किसी भी बदलाव को काफी महत्व दिया जाता है।