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मुंबई में रूबियो से मिलने पर जयशंकर का सवाल, क्या इंदिरा गांधी को भी बुलाया जाता था?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रीय राजधानी के बाहर होने वाली बैठकों को नेतृत्व में कमजोरी का संकेत मानने वाली आलोचनाओं को चुनौती दी है। उन्होंने तर्क दिया है कि ऐसी मुलाकातें किसी नेता के 'बुलाए जाने' का संकेत नहीं हो सकतीं।
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी हाल की मुंबई यात्रा में अमेरिकी राज्य सचिव मार्को रूबियो से मिलने को लेकर उठी आलोचनाओं का जवाब देते हुए एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। जयशंकर ने पूछा है कि क्या राष्ट्रीय राजधानी के बाहर की बैठकें आवश्यक रूप से किसी नेता के 'बुलाए जाने' का संकेत देती हैं।
जयशंकर के अनुसार, भारत के बाहर या दिल्ली के अलावा किसी अन्य स्थान पर होने वाली राजनयिक मुलाकातें किसी राजनीतिक कमजोरी का प्रतीक नहीं होनी चाहिएं। उन्होंने इस तर्क को दोहराया है कि राजनयिक बैठकें अक्सर पारस्परिक सुविधा और प्रोटोकॉल के आधार पर विभिन्न स्थानों पर आयोजित की जाती हैं।
विदेश मंत्री के इस बयान के माध्यम से स्पष्ट किया जा रहा है कि मुंबई में रूबियो से मुलाकात करना किसी भी प्रकार से भारतीय नेतृत्व की कमजोरी या विदेशी दबाव का संकेत नहीं है। यह राजनयिक प्रोटोकॉल और पारस्परिक सुविधा के अनुरूप निर्णय है।
भारत-अमेरिका संबंध महत्वपूर्ण हैं और ऐसी उच्च स्तरीय मुलाकातें दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मामलों पर विचार-विमर्श का एक सामान्य हिस्सा हैं। जयशंकर की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि सरकार अपनी विदेश नीति के निर्णयों के प्रति आत्मविश्वास बनाए रखती है।