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जन्माष्टमी 2026: भद्रा-पंचक से मुक्त, जानें शुभ मुहूर्त और व्रत समय
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 पर भद्रा और पंचक दोष का प्रभाव नहीं रहेगा। भक्तों के लिए यह वर्ष पूजा-पाठन के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
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इस वर्ष की कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भद्रा और पंचक ग्रहदोष से रहित होगा, जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। परंपरागत रूप से ये दोनों दोष पूजा-पाठन में बाधक माने जाते हैं, किंतु 2026 में जन्माष्टमी का समय इन विकट परिस्थितियों से मुक्त होगा।
भगवान कृष्ण की पूजा के लिए निर्धारित निशीथ काल वह विशेष समय होता है जब मध्यरात्रि को जन्म का अनुमान लगाया जाता है। इसी समयावधि में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है और इसे सर्वाधिक शुभ माना जाता है। पूजा मुहूर्त की सटीक जानकारी स्थानीय पंचांग और ज्योतिषी से प्राप्त की जानी चाहिए।
व्रत रखने वाले भक्तों के लिए व्रत-पारण का समय भी महत्वपूर्ण है, जिसका निर्धारण पूजा के समापन के पश्चात किया जाता है। राहुकाल से बचते हुए इस समय का निर्धारण किया जाता है। भक्तजन अपने क्षेत्र के पंचांग में दिये गये समय के अनुसार व्रत का पालन कर सकते हैं।
जन्माष्टमी भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है और इसे देशभर में भक्तिभाव से मनाया जाता है। इस बार दोष-मुक्त तिथि होने से धार्मिक कार्यों को संपन्न करने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी।