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संसद में दलित सांसदों के लिए अधिक समय देने की मांग को JDU का समर्थन
जेडीयू नेता श्याम राजक ने कहा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के सांसदों को विधेयकों पर बहस के अलावा अपने क्षेत्र की समस्याओं पर भी पर्याप्त बोलने का समय दिया जाना चाहिए।
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संसद में दलित सांसदों को अधिक समय देने की मांग को जनता दल यूनाइटेड ने अपना समर्थन दे दिया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्याम राजक ने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के प्रतिनिधियों को सदन में पर्याप्त मंच मिलना चाहिए।
राजक के अनुसार, दलित सांसदों को केवल विधेयकों पर बहस के दौरान ही नहीं बल्कि अपने संसदीय क्षेत्र से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बोलने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे समाज के वंचित वर्गों की आवाज संसद में बेहतर तरीके से सुनी जा सकेगी।
यह मांग जीतन राम मंजी की ओर से उठाई गई थी। मंजी का तर्क है कि संसद में पर्याप्त समय न मिलने से दलित और आदिवासी जनता की समस्याओं को पूरी तरह उजागर नहीं किया जा पाता है।
जेडीयू की इस मांग के साथ एक बार फिर सवाल उठा है कि संसद के अंदर सभी समुदायों के प्रतिनिधियों को समान अवसर देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दलित सांसदों को अधिक फ्लोर टाइम दिया जाता है तो यह संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने में मदद कर सकता है।