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जेएनयू छात्रों की भूख हड़ताल पर राष्ट्रपति का हस्तक्षेप मांगा
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों की 17वें दिन चल रही भूख हड़ताल को लेकर संसद सदस्य जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने में विफल रहा है।
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संसद सदस्य जॉन ब्रिटास ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों की भूख हड़ताल को समाप्त कराने के लिए राष्ट्रपति से सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की है। यह भूख हड़ताल 3 अक्टूबर से शुरू हुई है और वर्तमान में अपने 17वें दिन में प्रवेश कर चुकी है।
ब्रिटास के अनुसार, यह आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्र समुदाय की वास्तविक और दीर्घकालिक मांगों को संबोधित करने में विफल रहने का परिणाम है। छात्रों के अनुसार, उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें सालों से लंबित हैं और प्रशासन ने इन पर ध्यान देने की कोई पहल नहीं की है।
सांसद ने जेएनयू के प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई करने और छात्रों के साथ सार्थक वार्ता करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति का समाधान करने के लिए शीर्ष प्राधिकारियों का हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है।
जेएनयू छात्रों की यह भूख हड़ताल शिक्षा संस्थानों में छात्र कल्याण और प्रशासनिक जवाबदेहिता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है। विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह छात्रों की मांगों का समाधान करे और इस गंभीर स्थिति को तुरंत रोका जाए।