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जेएनयू का बाराक हॉस्टल: पूर्वोत्तर छात्रों के लिए बना, लेकिन केवल 12% रह रहे हैं
बेजबरुआ समिति की सिफारिश के बारह साल बाद भी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का बाराक हॉस्टल आरक्षण नीति का पालन नहीं कर रहा है। दो साल पुरानी इमारत में पहले से ही खस्ता हाल दिखने लगे हैं।
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का बाराक हॉस्टल विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों के लिए बनाया गया था, लेकिन यह अपने मूल उद्देश्य को पूरा करने में विफल साबित हुआ है। विश्वविद्यालय के छात्रों का आरोप है कि इस हॉस्टल में केवल 12 प्रतिशत छात्र ही पूर्वोत्तर क्षेत्र से हैं, जबकि नीति के अनुसार यहां 75 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए।
बेजबरुआ समिति ने बारह साल पहले पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए समर्पित आवास सुविधा की सिफारिश की थी। हालांकि, इस सुझाव के अनुरूप बने बाराक हॉस्टल में आरक्षण नीति का पालन नहीं हो रहा है। यह स्थिति उन छात्रों के लिए निराशाजनक है जिन्हें दूर-दराज के क्षेत्र से दिल्ली आकर पढ़ाई करनी होती है।
मात्र दो साल पुरानी इमारत में पहले से ही टूट-फूट के संकेत दिखने लगे हैं। छात्रों के अनुसार न केवल आरक्षण नीति बल्कि आवास सुविधा की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। यह मुद्दा जेएनयू प्रशासन और छात्र समुदाय के बीच गहरे असंतोष का कारण बन गया है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों को आवास और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एक समर्पित और सुविधाजनक हॉस्टल उनके लिए महत्वपूर्ण है। बेजबरुआ समिति की सिफारिश को लागू न करना विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है।