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जॉर्डन अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी हमलों की चपेट में
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना की मेजबानी करने वाले वाशिंगटन के करीबी सहयोगी जॉर्डन को इस रणनीतिक गठबंधन का भारी मूल्य चुकाना पड़ रहा है। ईरान द्वारा सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमलों ने राजशाही को आर्थिक संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच कठिन परिस्थिति में डाल दिया है।
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जॉर्डन दशकों से अमेरिका के साथ गहरे सुरक्षा संबंध विकसित करने और पश्चिमी दुनिया के साथ एक विश्वसनीय भागीदार बनने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, इस रिश्ते की कीमत चुकानी पड़ रही है। सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमले जॉर्डन के सैन्य अड्डों को निशाना बना रहे हैं, जहां अमेरिकी सेना तैनात है।
ये हमले जॉर्डन के पहले से ही दबे हुए अर्थव्यवस्था और पड़ोसी पश्चिम बैंक में होने वाली हिंसा की घटनाओं को और जटिल बना रहे हैं। इजरायली बसावटवादियों द्वारा फिलीस्तीनियों पर किए जा रहे हमले क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रहे हैं।
इसके बावजूद, जॉर्डन के नेतृत्व का कहना है कि वह अमेरिका के साथ अपने संबंध को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन जॉर्डन को ईरान द्वारा अपने पड़ोसियों को अस्थिर करने के प्रयासों से बचाव का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
राजा अब्दुल्लाह द्वितीय ने पिछले साल ऐसे सामरिक गठबंधनों की आवश्यकता को स्वीकार किया था, जब उन्होंने चेतावनी दी थी कि कोविड-19 संकट, रूस के यूक्रेन पर आक्रमण और क्षेत्र में अन्य अस्थिरताएं गहरे संकट का कारण बन सकती हैं। इसी पृष्ठभूमि में जॉर्डन पश्चिमी सुरक्षा व्यवस्था को अपनी सुरक्षा रणनीति का केंद्रीय अंग मानता है।